Sad Shayari: “जख्म-ए-यादें: उन पल-पल घुलती यादों की आग की कहानियाँ जहाँ खुशी और तन्हाई दोनों जलते हैं। हर शेर दिल के कोनों को चीरता है, बीती यादों की तासीर को सामने लाता है और दर्द को एक खूबसूरत सूरत में बयाँ करता है।”

तेरी खामोशी में भी आवाज़ ढूँढता हूँ,
तू मिली नहीं तो सहारा खुद से माँगा हूँ।
रातें तेरी याद में बेजान सी होकर गुजरती हैं,
सुबहें भी अब तेरे नाम की खबर ढूँढती हैं।
टूटे अरमानों की खातिर मुस्कान संभाल रखी है,
लब खाली हैं पर दिल में हजार बातें पली हैं।
तेरे जाने के बाद अल्फाज़ भी अधूरे लगते हैं,
हर लफ़्ज़ में अब सिर्फ तेरी कमी बोलती है।
वो पल जो साथ थे आज खामोश तस्वीर बन गए,
हंसते चेहरों के पीछे सिर्फ आँसुओं के साये हैं।

कहीं टुकड़ों में बिखरे हैं मेरे सपने सारी राहों में,
जो मंज़िल थी तेरी, अब बस यादों की राहों में।
तुझे भूलने की कसमें हमने ख़ुद से ही खाईं,
पर हर साँस में तेरा नाम फिर से सजाई।
दिल की दूकान में सिर्फ खालीपन का माल बचा है,
किसी ने खरीदा नहीं, कोई जाने वाला नहीं।
तेरे साथ बिताए लम्हों की परछाइयाँ सताती हैं,
हर खुशी के पीछे तेरी कमी रोती जाती है।
वक्त ने भी वफ़ा की बातों को धोखा दे दिया,
जो हम समझते थे अपना, वो रुखवा कर गया।

Sad Shayari: जख्म-ए-यादें: पल-पल घुलती यादों की आग जो दिल के कोनों को जला देती है
तेरी यादों की आग में जलता हुआ ये दिल,
हर रात तेरे बिना कटती नहीं और भी मुश्किल।
आँखों में बैठी बूँदों ने ख़ामोशी सी पाई,
लबों पर मुस्कान, लेकिन दिल में तू ही समाया।
उदासियों की चादर ओढ़े मैंने राहें काटीं,
हर मोड़ पर तेरा नाम तन्हा आँसू भी लाया।
कह दो उन हवाओं से कि अब लौटकर आना मुश्किल है,
तेरी यादों ने मेरे दिल को सहम कर रखा है।
तू नहीं तो क्या मिला इस दिल को बस सवाल मिले,
हर इंतज़ार की घड़ी ने खुद को वक़्त में बदल लिया।

इश्क़ नहीं रहा तो क्या, पर दर्द तो साथ चल रहा,
हर स्नेह की राह अब सिर्फ यादों से मिल रही है।
तेरे जाने का अंजाम कुछ इस तरह निकला,
मेरी राहतों की दुकान बंद और तन्हाई खुली रही।
खोए मुद्दत से मुसाफिर सी हालत मेरे दिल की,
हर खुश़ी मिली, पर तेरे बिना कुछ भी अधूरा रहा।
मैंने उम्मीदों की खेती की, पर फसल सूनी रही,
तेरी वफ़ा की बारिश ना हुई, धरती वीरान रही।
तेरा चेहरा आईने में दिखता है हर सुबह,
पर हाथों में खालीपन और आँखों में धुँधली यादें रहतीं।

शायद किसी मोड़ पर हम ही भूले थे दिल की कदर,
अब लौटने का नाम ले कर भी लौटने की हिम्मत नहीं।
तेरी कही-न-कही बातें अब जख्म बन कर रह गईं,
वक़्त के मरहम भी अब उनका रंग नहीं बदल पाए।
रिश्तों की नाव में दरारें आईं बड़ी धीरे-धीरे,
हमारे प्यार की पतवार टूट कर किनारे पर रह गई।
अधूरी बातें, अधूरा प्यार, और पूरा दर्द मेरा,
तू रह न सका साथ, पर तेरी यादें साथ रहतीं हैं हमेशा।
तेरी कमी से जो खामोशी बनी, वही मेरी आवाज़ बन गई,
अब तेरे होने की हसरत में मेरी हर खुशी थम सी जाती है।









