Mehndi Shayari in Hindi: प्यार की मीठी यादों, रंगों की महक और अपनापन के एहसास से सजी लफ़्ज़ों की दुनिया जो हर जश्न को ख्वाबों जैसा बना दे

Mehndi Shayari in Hindi: प्यार की मीठी यादों, रंगों की महक और अपनापन के एहसास से सजी मेहंदी शायरी के साथ हर जश्न को बनाइए खास। पढ़िए दिल को छू जाने वाली मेहंदी शायरी जो आपके जज़्बातों को खूबसूरती से बयां करती है।

Mehndi Shayari in Hindi

मेहंदी में क्यों ढूंढते हो नाम अपना,
आँखों में बसी तस्वीर देख लो मेरी..!

छुपाती रही वो हाथों की मेहंदी सबसे,
लगाती थी जब मेहंदी मेरे नाम की..!

नाम तेरा मेहंदी वाले हाथों में छुपा कर,
कैसे मैं किसी और से वफा निभाऊं..!

हवाई बारिशें क्या अब,
तो मेहंदी पायल भी सवाल करती है।

वो मेहंदी तेरे नाम की,
खुशबू तेरे प्यार की।

चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं,
बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं।

दोनों का मिलना मुश्किल है,
दोनों हैं मजबूर बहुत।

उस के पाँव में मेहंदी लगी है,
मेरे पाँव में छाले हैं।

पहले तो मोहब्बत की कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ,
तो मेहंदी रंग लाती है।

मेहंदी ने ग़ज़ब दोनों तरफ़ आग लगा दी,
तलवों में उधर और इधर दिल में लगी है।

Mehndi Shayari in Hindi: प्यार की मीठी यादों, रंगों की महक और अपनापन के एहसास से सजी लफ़्ज़ों की दुनिया जो हर जश्न को ख्वाबों जैसा बना दे

मेरे हाथों की लकीरों में वो नहीं,
उसके हाथों की मेहँदी में मैं नहीं।

मेहंदी की खुशबू से महके ये पल,
सपनों में बुनती प्यार की ये कल।

गुलाबी होठ और काली आंखें कहर ढा रही हैं,
ए सनम तेरे हाथों की मेहंदी इस दिल को धड़का रही है।

नाम यूँ ही मेहंदी का आता है,
रंग सारे पिया के होते हैं।

तेरे नाम की मेहंदी लगाई है मैंने,
छुपा के तुझसे हथेली दिखाई है मैंने।

मेहंदी के धोके मत रह, ज़ालिम निगाह कर तू,
ख़ूँ मेरा दस्त-ओ-पा से तेरे लिपट रहा है।

किस्मत की लकीरें भी आज इठलाई हैं,
तेरे नाम की मेहंदी जो हाथों पर रचाई है।

तेरे हाथों के मेहंदी का रंग गहरा लाल है,
क्योंकि मेरे इश्क़ का चाहत बेमिसाल है।

इन हाथों में लिख के मेहँदी से सजना का नाम,
जिसको मैं पढ़ती हूँ सुबह शाम।

तूने जो मेहँदी वाले हाथों में मेरा नाम लिखा है,
तुम कहो या न कहो तुम्हारे दिल का प्यार मुझे दिखा है।

उजली-उजली धूप की रंगत भी फीकी पड़ जाती है,
आसमान के हाथों जब शाम की मेहंदी रच जाती है।

रातभर बेचारी मेहंदी पिसती हैं पैरों तले,
क्या करूं कैसे कहूँ रात कब कैसे ढले।

काँच के पार तेरे हाथ नज़र आते हैं,
काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता।

मेहंदी लगाई थी मैने इन हाँथों,
में जाने कब वो मेरी लकीर बन गई।

तेरे हाथों की मेहंदी में मेरे प्यार का भी रंग है,
दिल छू लेने वाली ये खुशबू संग है।

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